Daily Answer Writing
23 November 2023

Que. Critically evaluate India's performance in tackling climate change in light of the findings of the Emissions Gap Report 2023 by UNEP.
(GS-03, 15 Marks, 250 Words)

प्रश्न : यूएनईपी की उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2023 के निष्कर्षों के आलोक में जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत के प्रदर्शन का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
(जीएस-03, 15 अंक, 250 शब्द)



  • Introduction: Provide a contextual introduction by mentioning the report.
  • Body: Highlights gaps as well as achievements of India in tackling climate change.
  • Conclusion: In this part, use Climate Change Performance Index 2023 for suggesting that ‘not only India but other major countries need to take more steps for tackling climate change’


Model Answer:

Recently UNEP launched its 14th Emission Gap Report which tracks our progress in limiting global warming well below 2°C and pursuing 1.5°C in line with the Paris Agreement.  The UNEP is the Global environmental governing body with universal membership encompassing all 193 UN Member States, thus its report is much significant in analyzing the India as well global progress towards tackling the climate change.


Report highlighted some gaps in India's performance in tackling the climate change:

  • Increased Emission: According to 14th Emission Gap Report, GHG emissions across the G20 increased by 1.2% in 2022, with increases in China, India, Indonesia, and the USA. India to date has contributed 5% of warming.

  • Reliance on Coal: According to 14th Emission Gap Report, India remains heavily reliant on coal for its energy needs, with coal accounting for over 70% of power generation. This reliance on a fossil fuel contradicts India's long-term climate goals.

  • Insufficient Emission Reductions: India's current emission reduction targets are not ambitious enough to align with the Paris Agreement's 1.5-degree Celsius goal.

  • Inadequate Infrastructure: The lack of adequate infrastructure, particularly in transmission and distribution networks, hinders the integration of renewable energy into the grid.

  • Financing Constraints: India need $500 to $600 billion per year to achieve their climate related goals, but inadequate financing remains a challenge for India's climate action plans.


But India has punched more than its weight in tackling the climate change, India has launched number of Initiatives, which can be seen in following ways:

  • National Adaptation Fund for Climate Change (NAFCC): It is implemented in project mode with 30 projects sanctioned in 27 States and UTs. Total project cost of ₹847.5 crores aimed at climate change adaptation.

  • Ramsar Sites and Mangrove Cover: India boasts 75 Ramsar sites covering 13.3 lakh ha, with 49 added in the last 8 years. Mangrove cover increased by 364 sq. km. in 2021 compared to 2013.

  • River Conservation and Rejuvenation: Government's efforts include mapping and converging the 5Ps - People, Policy, Plan, Programme, and Project.

  • Nationally Determined Contribution (NDC): India submitted an updated NDC under the Paris Agreement, targeting a 45% reduction in emissions intensity of GDP by 2030.

  • Renewable Energy Transition: Total investment in renewables stood at US$ 78.1 billion in India from 2014-2021. Expected installed capacity by 2029-30 is over 800 GW, with non-fossil fuel capacity exceeding 500 GW.

  • Green Hydrogen Mission: The National Green Hydrogen Mission aims to mobilize over ₹8 lakh crore of investment by 2030.

  • Additional Carbon Sink: Targeting an additional carbon sink of 2.5 to 3 billion tonnes of CO2 equivalent by 2030. Increase of 79.4 million tonnes of carbon stock compared to 2017 estimates.

  • Finance for Sustainable Development: India's financial strategies for sustainable development include:

    • Green Bonds: Union Budget 2022-23 announced Sovereign Green Bonds.

  • India's global initiatives encompass:

    • International Solar Alliance (ISA): Expanded coverage to all 110 member countries. Attained Permanent Observer Status at the UN General Assembly.

    • Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI): Thirty-one countries, six international organizations, and two private sector organizations joined CDRI.

  • Environmental Conservation and Biodiversity: India ranks eighth globally and fourth in Asia among mega-diverse countries. Achieved doubling the tiger population in 2018, four years ahead of the targeted year.

    • Wildlife (Protection) Amendment Act, 2022: Aims to increase the number of protected species and implement CITES.

  • Plastic Waste Management Amendment Rules, 2021, notified for reducing plastic pollution. Ban imposed on identified single-use plastic items.



The Climate Change Performance Index 2023 report was released recently, and India secured 8th position in the index which is 2 positions up from the last edition.  This shows result of India's multifaceted approach and strong commitment to address climate change, However, notable countries such as the USA, China, and the EU lag in proportionate efforts relative to their global warming impact, emphasizing the urgency for more concerted collective action against climate change.


  • भूमिका में, प्रश्न में उल्लिखित रिपोर्ट की चर्चा करते हुए एक प्रासंगिक भूमिका लिखे।
  • मुख्य भाग में,  जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की कमियों के साथ-साथ उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालता है।
  • निष्कर्ष में, यह सुझाव देने के लिए जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2023 का उपयोग करें कि 'न केवल भारत, बल्कि अन्य प्रमुख देशों को भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए और अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है।'


मॉडल उत्तर:

हाल ही में यूएनईपी ने अपनी 14वीं उत्सर्जन अंतर रिपोर्ट लॉन्च की है जो पेरिस समझौते के अनुरूप ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित करने और 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य रखने में हमारी प्रगति को ट्रैक करती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) एक वैश्विक पर्यावरण शासी निकाय है, जिसकी सार्वभौमिक सदस्यता में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश शामिल हैं, इस प्रकार इसकी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में भारत के साथ-साथ वैश्विक प्रगति का विश्लेषण करने में बहुत महत्वपूर्ण है।


रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत के प्रदर्शन में कुछ कमियों पर प्रकाश डाला गया है:

  • उत्सर्जन में वृद्धि: 14वीं उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट के अनुसार, चीन, भारत, इंडोनेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में वृद्धि के साथ, 2022 में जी20 देशों में जीएचजी उत्सर्जन में 1.2% की वृद्धि हुई। भारत ने अब तक वार्मिंग में 5% योगदान दिया है।

  • कोयले पर निर्भरता: 14वीं उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए कोयले पर बहुत अधिक निर्भर है, ध्यातव्य है कि बिजली उत्पादन में 70% से अधिक हिस्सेदारी कोयले की है। जीवाश्म ईंधन पर यह निर्भरता, भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों के प्रतिकूल है।

  • अपर्याप्त उत्सर्जन कटौती: भारत के वर्तमान उत्सर्जन कटौती लक्ष्य, पेरिस समझौते के 1.5-डिग्री सेल्सियस लक्ष्य के अनुरूप होने के लिए सक्षम रूप से महत्वाकांक्षी नहीं हैं।

  • अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा: पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की कमी, विशेष रूप से पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण नेटवर्क में, ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में बाधा उत्पन्न करती है।

  • वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ: भारत को अपने जलवायु संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रति वर्ष $500 से $600 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन अपर्याप्त वित्तपोषण भारत की जलवायु कार्य योजनाओं के लिए एक चुनौती बनी हुई है।


हालांकि भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी ताकत से कहीं अधिक प्रयास किया है, और इस संदर्भ में भारत ने कई पहलें शुरू की हैं, जिन्हें निम्नलिखित तरीकों से देखा जा सकता है:

  • जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC): इसे 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वीकृत 30 परियोजनाओं के साथ परियोजना मोड में लागू किया गया है। जिसमें जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर कुल परियोजना लागत ₹847.5 करोड़ लक्षित किया गया है।

  • रामसर स्थल और मैंग्रोव कवर: भारत में 13.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 75 रामसर स्थल हैं, जिनमें पिछले 8 वर्षों में 49 रामसर स्थल जोड़े गए हैं। वहीं वर्ष 2013 की तुलना में,  2021 में मैंग्रोव कवर में 364 वर्ग किमी की वृद्धि हुई।

  • नदी संरक्षण और कायाकल्प: सरकार के प्रयासों में 5पी – पीपल्स, पॉलिसी, प्लानिंग, प्रोग्राम और प्रोजेक्ट का मानचित्रण और अभिसरण (मैपिंग & कनवर्जिंग ) शामिल है।

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी): भारत ने पेरिस समझौते के तहत एक अपडेटेड एनडीसी प्रस्तुत किया, जिसमें 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी का लक्ष्य रखा गया है।

  • नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन: 2014-2021 तक भारत में नवीकरणीय ऊर्जा में कुल निवेश 78.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। वर्ष 2029-30 तक स्थापित क्षमता 800 गीगावॉट से अधिक अपेक्षित किया गया है, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 500 गीगावॉट से अधिक है।

  • ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश जुटाना है।

  • अतिरिक्त कार्बन सिंक: वर्ष 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन CO2 के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक का लक्ष्य रखा गया। 2017 के अनुमान की तुलना में 79.4 मिलियन टन कार्बन स्टॉक की वृद्धि हुई है।

  • सतत विकास के लिए वित्तपोषण: सतत विकास के लिए भारत की वित्तीय रणनीतियों में शामिल हैं:

    • ग्रीन बॉन्ड: केंद्रीय बजट 2022-23 में सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड की घोषणा की गई।

  • भारत की वैश्विक पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं:

    • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए): यह सभी 110 सदस्य देशों तक विस्तारित गठबंधन है। इसको संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

    • आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई): CDRI में 31 देश, 6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन और दो निजी क्षेत्र के संगठन शामिल हैं।

  • पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता: भारत विश्व स्तर पर 8वें और एशिया में मेगा-डायवर्सिटी वाले देशों में चौथे स्थान पर है। निर्धारित लक्ष्य प्राप्ति वर्ष से चार वर्ष पहले ही, 2018 में बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल किया गया।

    • वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022: इसका उद्देश्य संरक्षित प्रजातियों की संख्या बढ़ाना और CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) को लागू करना है।

    • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021: इसे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए अधिसूचित किया गया। जिसके माध्यम से चिन्हित एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया।



हाल ही में जारी जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2023 रिपोर्ट में भारत ने सूचकांक में 8वां स्थान हासिल किया, जो कि पिछले संस्करण से 2 स्थान ऊपर है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत के बहुआयामी दृष्टिकोण और मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम दर्शाता है। हालाँकि, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ जैसे उल्लेखनीय देश अपने ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव के सापेक्ष आनुपातिक प्रयासों में पीछे हैं, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अधिक ठोस सामूहिक कार्रवाई की तात्कालिकता पर जोर देते हैं।  


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